तिरंगा झुके नहीं

Tiranga jhuke nahiजमाखोरी, मिलावटखोरी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर यह उपन्यास करीब पच्चीस साल पहले लिखा गया था । ये समस्याएं आज भी हमारे समाज में ज्यों की त्यों है । कारण ये है कि देशभक्तो की वैसी टोली आज तक सामने ही नहीं आई जैसी की कल्पना इस उपन्यास में की गए थी ।

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